इस्तीफ़े की अनकही कहानी: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की विदाई

इस इस्तीफ़े को केवल एक समाचार बनकर भुला देना आसान है, लेकिन यदि हम लोकतंत्र को जीवित रखना चाहते हैं, तो इस चुप विदाई के पीछे की आवाज़ को सुनना होगा। भारतीय राजनीति में इस्तीफ़े केवल प्रशासनिक घटनाएँ नहीं होते, वे संकेत होते हैं—बदलते समीकरणों, असहमतियों और कभी-कभी भीतर ही भीतर उबाल मारते असंतोष के। […]

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